कन्यादान में पिता से 75 लाख रुपए मांग रही थी लड़की, जब वजह सामने आई तो चौंक गए सब…

कन्यादान में पिता से 75 लाख रुपए मांग रही थी लड़की, जब वजह सामने आई तो चौंक गए सब…

राजस्थान के बाड़मेर जिले के कानोड़ के रहने वाली किशोर सिंह की पुत्री अंजली ने अपनी पढ़ाई को लेकर काफी संघर्ष किया है क्योंकि जब उन्होंने 12वीं पास कर की थी. उस समय अंजली आगे पढ़ना चाहती थी लेकिन समाज के लोग ताने देने लगे की पढ़-लिखकर कौन सी कलेक्टर या एसपी बन जाओगी लेकिन पिता ने बेटी का साथ दिया और बेटी का सपना पूरा किया. वहीं, अंजली अभी एलएलबी की पढ़ाई कर रही है.

21 नवंबर को अंजली की शादी प्रवीण सिंह के साथ हुई. इसी दौरान अंजली ने अपने पिता से कहा कि बाड़मेर जिला मुख्यालय पर समाज की बालिकाओं के लिए छात्रावास बन रहा है, जिसके लिए अंजली के पिता किशोर सिंह कानों ने 1करोड़ रुपये पहले ही डोनेट किए थे लेकिन वह प्रोजेक्ट अधूरा है. वहीं, बेटी ने अपने पिता से इच्छा जताई कि कन्यादान के दौरान 75 लाख रुपये दिए हुए बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ाने के लिए इस छात्रावास को देना चाहती है. पिता ने कन्यादान में बेटी अंजली की इच्छा को पूरा कर दिया, जब यह बात कन्यादान के दौरान समाज के लोगों को पता चली तो हर किसी ने अंजली की तारीफ की.

नवविवाहित अंजली के अनुसार, बाड़मेर-जैसलमेर के ग्रामीण इलाकों में आज भी समाज में बेटियों की शिक्षा के लिए पर्याप्त साधन नहीं है. लोगों की मानसिकता भी पूरी तरीके से बदल नहीं पाई है. मैं तो पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चली गई लेकिन हर कोई नहीं जा सकता है इसीलिए मेरी इच्छा है कि बाड़मेर जिला मुख्यालय पर ही हमारे समाज की बालिकाओं के लिए छात्रावास बने, जहां पर बेटियां गांव से आ गए और तालीम को पूरा कर सके. यह बात मैंने अपने पिता से कहीं और पिता ने कन्यादान में 75 लाख रुपये हॉस्टल के लिए डोनेट कर दिए.

अंजली के दादा ससुर कैप्टन हीर सिंह भाटी के अनुसार, मेरी बहू ने जो हमारी समाज में बालिकाओं की शिक्षा को लेकर मिसाल पेश की है, वह यकीनन काबिले तारीफ है. हम सब यही चाहते हैं कि हमारी समाज की बेटियां पढ़-लिखकर कुछ बने.

पिता किशोर सिंह के अनुसार, हमारे समाज की बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए मैंने एक छात्रावास निर्माण के लिए एक करोड़ दे दिए थे लेकिन उसकी लागत 75लाख रुपये और बढ़ गई इसलिए बेटी ने कन्यादान पर इच्छा जताई और मैंने तो सिर्फ अपना फर्ज निभाया और बेटी की इच्छा को पूरा किया.

पश्चिमी राजस्थान का यह इलाका किसी जमाने में बेटियों को पैदा होते ही मार देता था क्योंकि बेटियां रखना अभिशाप माना जाता था लेकिन बदले हालातों के साथ ही अब यहां पर बेटियां बेटों से कम नहीं है. लिहाजा परिवार के लोग भी बेटियों के सपनों को साकार करने के लिए बेटियों के कदम के साथ कदम मिलाते नजर आ रहे हैं.

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