पेट्रोल पंप पर काम करने वाले का बेटा 21 साल में बना IAS ऑफिसर

पेट्रोल पंप पर काम करने वाले का बेटा 21 साल में बना IAS ऑफिसर

मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और उसे पूरे करने का लगन हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। इसे साबित किया है मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह ने। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा शुक्रवार की शाम घोषित रिजल्ट में प्रदीप को पूरे भारत में 93 रैंक मिली है। प्रदीप की उम्र अभी सिर्फ 22 साल है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ने वाले प्रदीप के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।

जानकारी के मुताबिक इंदौर के देवास नाका क्षेत्र में रहने वाले पेट्रोल पंप कर्मचारी मनोज सिंह के बेटे प्रदीप सिंह ने ऑल इंडिया में 93वीं रैंक हासिल की है। DAVV के इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (IIPS) से 2017 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रदीप ने फर्स्ट अटेंप्ट में ही UPSC की परीक्षा पास की है।

प्रदीप ने बताया, उनका जीवन संघर्ष भरा रहा है फिर भी बचपन से ही सपना था कि कुछ कर दिखाऊं। जब बीकॉम में एडमिशन लिया था, तब भी यही सपना था कि कुछ बनना है। उन्होंने कहा, मेरी कोशिश है कि अपनी इस छोटी सी सफलता से माता-पिता के संघर्ष को कम कर सकूं।

प्रदीप की यूपीएससी की तैयारी के लिए पिता मनोज सिंह और घर के बाकी के सदस्यों ने अनेक त्याग किए। प्रदीप यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आना चाहता था, लेकिन घर में इतने पैसे नहीं थे कि दिल्ली के महंगे कोचिंग की फीस दी जा सके।

इसके बावजूद पिता ने हार नहीं मानी और बेटा कोचिंग में पढ़ाई कर सके इसके लिए अपना घर बेच दिया। इसके बाद वह 2017 से दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। प्रदीप ने बताया कि उनका जीवन काफी संघर्ष भरा है। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश है कि अपनी इस छोटी सी सफलता से माता-पिता के संघर्ष को कम कर सकूं।

प्रदीप जब यूपीएससी की परीक्षा दे रहे थे उस वक्त उनकी मां की तबीयत खराब थी, लेकिन प्रदीप पर इसका कोई असर न पड़े इसके लिए पिता ने बेटे को मां की तबीयत के बारे में भी नहीं बताया था। प्रदीप के परिवार में माता-पिता और दो भाई हैं। पिता मनोज का कहना है, मेरे लिए यह दिन कभी नहीं भूलने वाला दिन है। कुछ साल पहले तक मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा देशभर में नाम रोशन करेगा।

गरीबी हालत में भी उनके माता-पिता ने बच्चों को पढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। प्रदीप सिंह के पिता मनोज सिंह ने बताया, वह पेट्रोल पंप पर नौकरी करते हैं और अपनी जरूरतों को कम करके बच्चों को पढ़ाया।

उसी का नतीजा है की बेटा आज IAS अफसर बन गया। कई बार मुसीबतें भी आईं, लेकिन पिता ने बच्चों तक नहीं पहुंचने दिया। बच्चों की पढ़ाई के लिए घर बेचने के बाद से परिवार किराए के मकान में रहता है। इसके अलावा मां अनीता ने अपने गहने तक गिरवी रख दिए थे।

प्रदीप ने इंदौर के आईआईपीएस से बीकॉम की पढ़ाई की है। प्रदीप की इच्छा है कि वह आगे चलकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करें। इस बार के रिजल्ट में कुल 759 कैंडिडेट को यूपीएससी ने आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और अन्य ग्रुप ए और बी की सेवा के लिए चयनित किया है।

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