मोबाइल गेम छोड़कर के बच्चों ने किसान पिता का दिया साथ, कुछ ही महीनों में हुआ ढाई लाख का फायदा

मोबाइल गेम छोड़कर के बच्चों ने किसान पिता का दिया साथ, कुछ ही महीनों में हुआ ढाई लाख का फायदा

हरियाणा में झज्जर के एक गांव में रहने वाले कुलदीप सुहाग अपने 2 एकड़ की जमीन पर जैविक खेती कर रहे हैं और हैरानी की बात तो यह है कि उनके घर के दो छोटे-छोटे बच्चे उनकी मदद कर रहे हैं। कोरोना काल में सभी कॉलेज स्कूल बंद हो जाने के कारण अब सभी बच्चे सिर्फ टैबलेट, लैपटॉप एवं मोबाइल पर ही पढ़ते हैं। लैपटॉप एवं मोबाइल को अपने सामने रखने की वजह से उनके शरीर में दिक्कत भी आ सकती है।

लेकिन आज हम आपको एक ऐसे परिवार की कहानी बताने जा रहे हैं जिनके बच्चे ऑनलाइन क्लास खत्म होने के बाद वीडियो गेम खेलने के बजाय, खेतों पर काम करने के लिए पहुंच जाते हैं। वे खेतों से उपजाई गई सभी साग सब्ज़ियों को इकट्ठा करते हैं और ग्राहकों को बेच देते हैं जिससे उन्हें काफी मुनाफा होता है।

मातनहेल गाँव में रहने वाले 44 वर्षीय कुलदीप सुहाग के घर के सभी बच्चे पढ़ाई करने के साथ-साथ उनका हाथ बढ़ाते हैं। कुलदीप ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले अपने 2 एकड़ जमीन में जैविक खेती करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कई खेती के नुकसान को भी सहना पड़ा था। साथ ही साथ जैविक खेती में मेहनत बहुत ही ज्यादा लगता है इसलिए हमें मजदूरों से भी काम कराना पड़ा था।

कुलदीप ने बताया कि वह एक किसान परिवार से आते हैं। वह सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई किए हैं। उन्होंने 1995 ईस्वी में खेती करना शुरू कर दिया वह पहले रासायनिक खेती करते थे लेकिन इससे उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने 2003 में खेती को छोड़ दिया। फिर अपने गांव में ही एक मोबाइल दुकान खोली पर किसी कारण से उसे भी बंद कर दिया।

फिर से वह खेती में आ गए पर इस बार उन्होंने फैसला किया कि वह रासायनिक खेती नहीं जैविक खेती करेंगे। कुलदीप ने बताया कि उन्हें जैविक खेती करने की प्रेरणा, सासरौली गाँव के रहने वाले डॉ. सत्यवान ग्रेवाल से मिली पर इस बार इस खेती में भी एक बार नुकसान हुआ। फिर वह सोच में पड़ गए। फिर घरवालों से राय लेने के बाद उन्हें लगा जैविक खेती करनी चाहिए ताकि जमीन की मिट्टी की हालत सुधरे।

फिर कुलदीप अपने खेतों में ककड़ी, टमाटर, खरबूजा, प्याज, लहसुन आदि की खेती करते हैं।

उन्होंने 2021 जनवरी में उन्होंने कई प्रकार के बीज बोना शुरू कर दिया। फिर अप्रैल के महीने में वह सभी साथियों को निकाल लिए और इन चार-पांच महीनों में उन्हें ढाई लाख का मुनाफा हुआ। वह इस काम में और भी ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं।

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