सरकारी योजना के तहत लगाया किचन गार्डन, अब मिल रही शुद्ध हवा और ताजा सब्जियां

सरकारी योजना के तहत लगाया किचन गार्डन, अब मिल रही शुद्ध हवा और ताजा सब्जियां

बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले राकेश रमण श्रीवास्तव ने अपने छत को एक सुंदर से बगीचे में बदल दिया है। इस छत की सुंदरता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि शाम के समय उनके आस-पड़ोस के लोग भी अपनी छतों से उनकी छत को निहार रहे होते है।

राकेश ने अपनी छत पर 1000 वर्गफीट में दो भागों में बगीचा तैयार किया हुआ है। एक हिस्से का बगीचा उन्होंने खुद तैयार किया है, दूसरे हिस्से का बगीचा उन्होंने बिहार सरकार की ‘छत पर बागवानी’ योजना के तहत तैयार कराया है। उनके बगीचे में आप 150 गमले, अलग-अलग तरह के ग्रो बैग में फूल, सब्जियां और फलों के पेड़-पौधे के साथ ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था देख सकते हैं।

बिहार सेक्रेटेरिएट में सेक्शन ऑफिसर पद से रिटायर राकेश ने द बेटर इंडिया को बताया, “मुझे घर में पेड़-पौधे लगाने का शौक हमेशा से रहा है। रिटायरमेंट से पहले तक हमारी छत पर कुछ ही फूलों के पेड़-पौधे थे। लेकिन रिटायरमेंट के बाद हमने सोचा कि अपने बगीचे को बढ़ाया जाए।”

राकेश को बागवानी का शौक हमेशा से ही रहा और इसके साथ ही, उन्हें साहित्य से भी खास रूचि है। उनकी कुछ किताबें प्रकाशित भी हो चुकी हैं। अपनी पत्नी, प्रिती श्रीवास्तव के साथ मिलकर बगीचे की देखभाल करते हैं। डेढ़ साल पहले तक उनके घर में लगभग 75 गमलों में अलग-अलग फूलों के पेड़-पौधे लगे हुए थे।

लेकिन अब उन्हें अपने बगीचे से न सिर्फ खूबसूरत फूल बल्कि ताजा और जैविक सब्जियां भी मिल रही हैं। सप्ताह में लगभग चार-पांच दिन, उनके घर में बगीचे में उगी सब्जी बनाई जाती है। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने बागवानी के सफर के बारे में विस्तार से बताया।

सब्सिडी के माध्यम से लगवाया किचन गार्डन:

राकेश बताते हैं कि उन्हें और उनकी पत्नी को हमेशा से प्रकृति से लगाव रहा है। हालांकि, पहले अपनी नौकरी के कारण वह बगीचे में बहुत ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। पर रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने बगीचे को बढ़ाने की सोची। वह कहते हैं कि उन्होंने अपने बगीचे में और गमले लगाए और पेड़-पौधे भी।

सुबह-शाम अपने बगीचे की देखभाल में समय बिताने वाले राकेश कहते हैं कि पहले उन्होंने सिर्फ फूल ही अपने बगिया में लगाए हुए थे। लेकिन एक दिन, उन्हें बिहार सरकार की एक योजना के बारे में पता चला, जिसके तहत, बिहार सरकार बिहार के चार शहरी क्षेत्रों में घरों की छत पर बागवानी को बढ़ावा देने के लिए लोगों को सब्सिडी दे रही है। उन्होंने इस योजना के बारे में जानकारी इकट्ठा की तो उन्हें पता चला कि इसके तहत वह किचन गार्डन सेटअप करा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार उन्होंने तीन बड़े ग्रो कंटेनर, 10 बड़े ग्रो बैग, 15 गमले, चार गार्डनिंग किट, सब्जियों और फलों के पौधे, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, गार्डनिंग के टूल आदि मिले हैं। सभी सेटअप भी एक्सपर्ट्स की टीम के द्वारा ही किया गया। एक्सपर्ट ने न केवल सभी कंटेनर, ग्रो बैग और गमलों को सेट किया बल्कि इनमें कोकोपीट, जैविक खाद आदि मिलाकर पॉटिंग मिक्स भी भरा है।

“अगर सिर्फ जैविक खाद की ही बात करें तो 40 किलो के लगभग 30 बैग वह जैविक खाद के लेकर आये थे। पॉटिंग मिक्स भरने के बाद, उन्होंने सभी साग-सब्जियों के बीज, पौधे लगाए और आम, चीकू, नींबू, अंजीर, पपीता, केला, आंवला, अमरुद जैसे फलों के भी पेड़ लगाए। अगर आप नर्सरी से कोई भी फल का बड़ा पेड़ लेते हैं तो यह आपको 250 रुपए से ज्यादा ही पड़ता है,” वह कहते हैं।

मिल रही हैं ताजा सब्जियां:

बगीचा सेटअप करने के साथ-साथ इसमें ड्रिप इरिगेशन सिस्टम भी लगाया है ताकि पानी देने में ज्यादा परेशानी न हो। राकेश कहते हैं कि अब तक वह अपने बगीचे से बैंगन, लौकी, तोरई, करेला, खीरा, चौलाई साग जैसी सब्जियों का आनंद ले चुके हैं। उनके फलों के पेड़ भी अच्छे से विकसित हो रहे हैं।

राकेश कहते हैं, “अगर मैं खुद से सभी कार्य करता तो भी इस तरह का सेटअप नहीं कर पाता, जैसा मुझे इस योजना के तहत मिला है। यह एक बार का निवेश है, जिसके बाद आपको कई सालों तक भी अपने बगीचे के लिए कोई पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन मेहनत पूरी करनी होगी।”

एक्सपर्ट की टीम बगीचा सेटअप कर सकती है। लेकिन यह अच्छी तरह से विकसित हो इसके लिए राकेश और उनकी पत्नी पूरा दिन मेहनत करते हैं। सभी पेड़-पौधों की निराई-गुड़ाई करना, गमलों को इधर-उधर सेट करना, बगीचे को साफ़-सुथरा रखना, यह सभी काम राकेश खुद कर रहे हैं। बीच-बीच में एक्सपर्ट की टीम से भी लोग आकर अपडेट लेते हैं ताकि बगीचे में कोई कीट न लगे।

फिलहाल, राकेश के बगीचे में 150 से ज्यादा पेड़-पौधे हैं और धीरे-धीरे उनके बगीचे में पौधे बढ़ ही रहे हैं। उन्होंने अपने बगीचे को ‘रमण बाग़’ का नाम दिया हुआ है। बगीचे में लाइटिंग लगाकर इसे और आकर्षक बनाया है ताकि शाम के समय वह अच्छा समय यहां बिता सकें। किसी भी समय आप उनके बगीचे में पक्षियों का कोलाहल सुन सकते हैं।

आस-पड़ोस में भी बाँट रहे हैं सब्जी और फल:

उन्होंने आगे बताया कि उन्हें अपनी छत से लौकी और तोरई काफी मिले हैं। बीच-बीच में कई बार उन्होंने अपने पड़ोसियों को भी सब्जियां दी। “एक बार मैंने सब्जी बेचने वालों को भी 10 लौकी दिए थे कि आप बेचकर कुछ कमा लीजिएगा। घर पर सिर्फ मैं और मेरी पत्नी रहते हैं और कई बार कुछ सब्जियां आवश्यकता से ज्यादा हो जाती हैं। इसलिए हम दूसरों को भी जैविक सब्जियां खिला पा रहे हैं।”

अपने घर की छत पर बगीचा लगाने के अलावा, उन्होंने अपने घर की बगल में खाली पड़ी एक छोटी-सी जमीन पर भी गुलमोहर, अशोक, पाम, हरसिंगार, सहजन, अमरुद, उड़हुल, केला जैसे पेड़ लगाए हुए हैं। इनसे अब उन्हें अच्छी उपज भी मिल रही है। केला के पेड़ से उन्हें साल में तीन-चार बार केले मिल जाते हैं। लगभग 25 दर्जन केले एक बार में उन्हें इस पेड़ से मिलते हैं। जिनमें से कुछ उनके अपने घर में इस्तेमाल होते हैं तो कुछ पड़ोसियों में बांट दिए जाते हैं।

इस तरह से, उनके बगीचे से न सिर्फ उन्हें बल्कि उनके पड़ोसियों को भी जैविक सब्जी-फल खाने को मिल रहे हैं। राकेश बताते हैं कि उनके बगीचे से न सिर्फ उनकी रसोई की जरूरत पूरी होने में मदद मिल रही है बल्कि इससे उन्हें मानसिक तौर पर भी काफी मदद मिली है। वह कहते हैं, “मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया था तो मैं कहीं बाहर घूमने नहीं जा पाता था। इसलिए कई बार ऊब होने लगती और मन भी उदास हो जाता है। लेकिन जब भी ऐसा होता है तो मैंने अपने बगीचे में पहुंच जाता हूँ और हरियाली को देखकर मन में जो शांति और ख़ुशी आती उसका कोई मुक़ाबला नहीं है। इसलिए मेरी कोशिश है कि मैं अपने आसपास की खाली जगहों को हरियाली से भर दूं।”

बिहार सरकार की इस योजना के तहत आवेदक को 25 हजार रुपए देने पड़ते हैं और बाकी सब खर्च सरकार की तरफ से होता है। “अक्सर लोगों को यह सुनकर लगता है कि पैसे ही देने हैं तो हम खुद यह काम कर लेंगे। लेकिन मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि अगर आप कम समय में इस तरह का अच्छा बगीचा सेटअप करना चाहते हैं तो यह योजना सबसे उपयुक्त है। क्योंकि अकेले आप क्या-क्या करेंगे? और अगर इस स्तर पर बगीचा सेटअप करना हो तो सभी सामान, इनकी क्वालिटी को देखते हुए मैं कहूंगा कि आपके 25 हजार रुपए से ज्यादा पैसे खर्च होंगे,” राकेश ने कहा।

इस योजना के तहत बिहार राज्य के चार जिले पटना के पटना सदर, दानापुर, फुलवारी, समपत्चक, गया के गया शहरी, बोध गया, मानपुर, मुजफ्फरपुर के मुशहरी, काँटी और भागलपुर के जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर प्रखण्डों में इस योजना का लाभ लिया जा सकता है। वैसे व्यक्ति जिनके पास अपना घर हो तथा वैसे व्यक्ति जो अपार्टमेन्ट में रहते है, जिनके पास अपना घर अथवा अपार्टमेनट में फ्लैट हो, वे इस योजना का लाभ ले सकते है।

राकेश का कहना है कि इस योजना के तहत एक बार के निवेश से आप अपने घर में सालों-साल के लिए फल-सब्जियों का इंतजाम कर सकते हैं। अगर आप बिहार सरकार की इस योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। राकेश से संपर्क करने के लिए आप उनसे फेसबुक (https://www.facebook.com/rakeshraman.srivastava) के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Air News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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