राजस्थान के मुकेश ने 5 साल पहले सरकारी नौकरी छोड़ हर्बल प्रोडक्ट का स्टार्टअप शुरू किया, अब सालाना 4 करोड़ रुपए का बिजनेस कर रहे हैं

राजस्थान के मुकेश ने 5 साल पहले सरकारी नौकरी छोड़ हर्बल प्रोडक्ट का स्टार्टअप शुरू किया, अब सालाना 4 करोड़ रुपए का बिजनेस कर रहे हैं

पिछले कुछ सालों में हर्बल प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी है। छोटे शहरों के साथ ही बड़े शहरों में भी लोग इस तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। खास कर कोरोना के बाद इसकी मांग और अधिक बढ़ गई है। यही वजह है कि इस सेक्टर में नए-नए स्टार्टअप भी उतर रहे हैं और बेहतर कमाई भी कर रहे हैं। राजस्थान के जयपुर में रहने वाले मुकेश कुमार बहरोड ने 5 साल पहले ही इस अवसर को भांप लिया था और सरकारी नौकरी छोड़कर हर्बल प्रोडक्ट का स्टार्टअप शुरू कर दिया था। हालांकि बड़े लेवल पर उन्हें कामयाबी कोविड के बाद मिली। फिलहाल वे देशभर में ऑफलाइन और ऑनलाइन लेवल पर हर्बल प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर रहे हैं। उनका सालाना टर्नओवर 4 करोड़ रुपए है।

37 साल के मुकेश एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई जयपुर में ही हुई। 2009 में MBA करने के बाद उन्होंने एक कंपनी में नौकरी शुरू की। कुछ साल काम करने के बाद राजस्थान सरकार के रूरल डिपार्टमेंट में उनकी नौकरी लग गई। सैलरी और पोजिशन दोनों अच्छी थी, लेकिन उनका मन नहीं लगा। वे ऑफिस टाइम बॉन्ड में काम नहीं करना चाहते थे, वे मन मुताबिक कुछ करना चाहते थे। लिहाजा दो साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

मुकेश कहते हैं कि 2013 के आसपास मैं अपने दोस्त के यहां गया था। उसके यहां एलोवेरा की खेती होती थी। वे लोग एलोवेरा का पल्प निकालकर मार्केट में भेजते थे। मुझे उनका काम अच्छा लगा। उसके बाद से ही मैं खुद का कुछ इसी तरह का काम करने के बारे में सोचने लगा। फिर बाद में मैंने नौकरी छोड़ दी।

30 हजार रुपए की लागत से की स्टार्टअप की शुरुआत

मुकेश कहते हैं कि जब एक बार तय कर लिया कि हर्बल फील्ड में काम करना है तो सबसे पहले नौकरी छोड़कर मैंने 6 महीने तक रिसर्च किया। अलग-अलग जगहों पर जाकर किसानों से मुलाकात की, उनके काम करने के तरीकों को समझा और चंडीगढ़ स्थित एक प्रोडक्शन हाउस में हर्बल प्रोडक्ट तैयार करने की प्रोसेस समझी। इसके बाद किराए पर एक ऑफिस लिया और साल 2016 में 30 हजार रुपए की लागत से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की। अपनी मदद के लिए मैंने दो और लोगों को हायर किया।

मुकेश अपनी टीम के साथ पहले किसानों के पास जाते थे, उनके खेत से एलोवेरा कलेक्ट करते थे। इसके बाद अपने यूनिट लाकर उसकी सफाई करते थे और फिर इससे जूस तैयार करके मार्केट में भेजते थे। कुछ दिनों तक उन्होंने ऐसे ही काम किया। धीरे-धीरे उन्हें लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा और आमदनी होने लगी। फिर वे जूस के साथ-साथ दूसरे प्रोडक्ट भी तैयार करने लगे।

मुकेश कहते हैं कि एक साल काम करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि हमें मार्केटिंग का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। तब सोशल मीडिया तेजी से उभर रहा था, लोग मार्केटिंग के लिए इस प्लेटफॉर्म को अपना रहे थे, लेकिन मुझे इसकी कोई खास जानकारी नहीं थी। फिर भी मैंने ऑनलाइन मीडिया पर मौजूदगी बनाई और sovamindia.com नाम से खुद की वेबसाइट तैयार की। इस पर हमने प्रोडक्ट अपलोड किए और मार्केटिंग शुरू कर दी।

जैसे-जैसे आमदनी होती गई, कंपनी में इन्वेस्ट करते गया

मुकेश कहते हैं कि शुरुआत हमने छोटे लेवल से की थी क्योंकि अपने पास पहले से बहुत ज्यादा बजट नहीं था। इसके बाद जैसे-जैसे हमारा काम आगे बढ़ता गया, हम प्रोडक्ट की लिस्ट बढ़ाने के साथ ही इन्वेस्ट भी करते गए। पहले जयपुर में हम एक छोटे से ऑफिस में काम करते थे, फिर हमने 10 हजार स्क्वायर फीट का नया ऑफिस ले लिया। इसके बाद हमने अपना दायरा और आगे बढ़ाया और एक दूसरी यूनिट भी शुरू कर दी। पहली यूनिट में हम लिक्विड प्रोडक्ट तैयार करने लगे जबकि दूसरी यूनिट में पाउडर वगैरह। फिलहाल मुकेश 500 से ज्यादा हर्बल प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं।

ऑनलाइन देशभर में मार्केटिंग, बड़ी कंपनियों के लिए होलसेल में तैयार करते हैं प्रोडक्ट

मुकेश बताते हैं कि हम लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन लेवल पर देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। अगर किसी को रिटेल में प्रोडक्ट चाहिए तो वह फ्लिपकार्ट या अमेजन के जरिए शॉपिंग कर सकता है। इसके अलावा इंडिया मार्ट पर भी हमारे प्रोडक्ट उपलब्ध हैं। जहां से लोग ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं।

इसके अलावा हम लोग बड़े लेवल पर होलसेल मार्केटिंग करते हैं। कई बड़ी कंपनियों के लिए हम प्रोडक्ट बनाते हैं। अभी करीब 400 ऐसी कंपनियों से हमारा टाइअप है। ये कंपनियां अपने हिसाब से कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट का ऑर्डर देती हैं। जिसे तय वक्त में तैयार करने के बाद हम उस प्रोडक्ट की डिलीवरी कर देते हैं।

काम के प्रोसेस को लेकर मुकेश कहते हैं कि हमने कुछ किसानों से डील कर रखी है। वे हमको रॉ मटेरियल प्रोवाइड कराते हैं। जबकि कुछ किसान खुद ही अपने प्रोडक्ट हमारी यूनिट में पहुंचा देते हैं। दो दर्जन से ज्यादा ऐसे किसान अभी हमारे साथ जुड़े हैं।

रॉ मटेरियल कलेक्ट करने के बाद उनकी अच्छी तरह से क्लीनिंग की जाती है। रिवर्स ऑस्मोसिस यानी RO वॉटर मशीन से ट्रीटमेंट करते हैं। इसके बाद उसकी कटिंग की जाती है और उससे जूस निकाला जाता है। इसके लिए हमारी यूनिट में ऑटोमेटिक मशीनें लगी हैं। फिर प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम होता है। अभी मुकेश के साथ 80 लोग काम करते हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं।

अगर हर्बल प्रोडक्ट के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो ये दो खबरें जरूर पढ़ें

मुंबई में रहने वाली हिना योगेश ने MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ सालों तक नौकरी की। इसके बाद किसी कारणवश उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। पिछले साल अगस्त में उन्होंने घर से ही हेल्थ सप्लीमेंट्स का स्टार्टअप शुरू किया। आज उनके पास 20 से ज्यादा प्रोडक्ट्स हैं, देशभर में मार्केटिंग कर रही हैं। हर महीने 2.5 लाख का टर्नओवर वे हासिल कर रही हैं।

इसके अलावा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में रहने वाले अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती और प्रोसेसिंग कर रहे हैं। अभी वो इससे 45 तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एलोवेरा से लड्डू तैयार किया है। इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसकी खेती से वे हर महीने एक लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Air News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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