गांव की बेटी भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट बनके वापस लौटी तो गांव ने किया भव्य स्वागत, देखिए गदगद होके पिता ने क्या कहा ?

गांव की बेटी भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट बनके वापस लौटी तो  गांव ने किया भव्य स्वागत, देखिए गदगद होके पिता ने क्या कहा ?

बाड़मेर की बिटिया प्यारी चौधरी भारतीय सेना में पहली बार में मेडिकल विभाग में लेफ्टिनेंट बनी है। प्यारी ने नहीं केवल बाड़मेर का नाम रोशन किया, पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया है। प्यारी चौधरी संभवत: बाड़मेर की पहली महिला लेफ्टिनेंट है। लेफ्टिनेंट प्यारी चौधरी के परिवार में एक-दो नहीं 6-6 सदस्य फौज में हैं।

बाड़मेर जिले के राऊजी की ढाणी काऊ खेड़ा कवास निवासी किस्तुराराम (48) आर्मी में सूबेदार पद पर पठानकोठ में तैनात है। किस्तुराराम के एक लड़का गोरख सिंह और लड़की प्यारी चौधरी है। प्यारी वर्तमान में भारतीय सेना के मेडिकल विभाग से लेफ्टिनेंट के पद पर अहमदाबाद में तैनात है। जो सीधे सेना में कमीशन प्राप्त करने के लिए ऑल इंडिया लेवल पर लिखित परीक्षा मेरिट प्राप्त कर इंटरव्यू व मेडिकल टेस्ट पास किया। लिखित परीक्षा का रिज़ल्ट अप्रैल 2016 में आ गया था। सितम्बर 2016 में ज्वाइन करने के साथ ही ट्रेनिंग शुरू हो गई। करीब साढे चार वर्ष की ट्रेनिंग के बाद सेना में कमीशन प्राप्त किया।

प्रारंभिक शिक्षा से लेफ्टिनेंट तक का सफर

पिता किस्तुराराम ने बताया कि बेटी प्यारी का जन्म 31 दिसम्बर 1997 को बाड़मेर में हुआ। प्यारी ने प्रारंभिक शिक्षा पटियाला के आर्मी नर्सरी स्कूल से की। पिता की भारतीय सेना में अलग-अलग जगह पोस्टिंग थी तो अधिकांश पढ़ाई अमृतसर, लालगढ़ व श्रीगंगानगर के सैनिक व केंद्रीय स्कूल में हुई। इसके बाद महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की। सेना में कमीशन प्राप्त करने के लिए ऑल इंडिया लेवल पर लिखित परीक्षा मेरिट प्राप्त कर इंटरव्यू व मेडिकल टेस्ट पास किए। ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर प्यारी चौधरी को सेना के मेडिकल विभाग में ऑफिसर रेंक में लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्ति मिली।

लेफ्टिनेंट बनने का श्रेय अपने माता-पिता

प्यारी चौधरी ने लेफ्टिनेंट बनकर पिता के सपने को साकार कर दिखाया है। बेटी के लेफ्टिनेंट ऑफिसर बनने पर गांव के लोगों ने खुशी जताई। वहीं पिता किस्तुराराम और बेटी प्यारी को बधाइयां दी है। प्यारी चौधरी बताती है कि मैं इस मुकाम तक पहुंची। इसके पीछे पूरा श्रेय मेरे माता-पिता का है। मैं उस क्षेत्र से हूं, जहां लड़कियों को मां-बाप इतना नहीं पढ़ाते हैं। मेरे माता-पिता न कभी भी मुझे रोका-टोका नहीं। हर समय मेरे साथ खड़े रहे। उन्होंने बताया कि पढ़ाई को लेकर हमेशा माता-पिता गाइड करते रहते थे। स्कूल से आने के बाद मां पढ़ाती थी और शाम को पिता पढ़ाते थे।

परिवार के 6 सदस्य हैं फौजी

प्यारी चौधरी के दादा के परिवार में एक-दो नहीं 6-6 सदस्य सेना में फौजी है। दादा भानाराम के तीन बेटे कलाराम, जोधाराम व किस्तुराराम है। ताऊ कलाराम का सोना से रिटायर्ड होने के बाद 2004 में मृत्यु हो गई थी। ताऊ जोधाराम कैप्टन बनने के बाद रिटायर हो गए है। पिता किस्तुराराम अभी सूबेदार पद पर तैनात है। ताऊ जोधाराम का बेटा हीराराम और कलाराम का बेटा जसंवत नायक पद पर तैनात हैं।

लेफ्टिनेंट के बनने पहली बार आई गांव

प्यारी चौधरी लेफ्टिनेट बनने के बाद पहली बार बाड़मेर अपने गांव दो दिन पहले ही आई थी। प्यारी के गांव में आने के बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया गया। लोगों ने मीठा करवाया। गांव की महिलाओं ने भी प्यारी का सम्मान किया।

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