बेटे की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ी, खाली वक्त में यूट्यूब से मैक्रमे आर्ट सीखा; अब उसके बिजनेस से हर महीने 1 लाख रुपए कमा रही हैं

बेटे की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ी, खाली वक्त में यूट्यूब से मैक्रमे आर्ट सीखा; अब उसके बिजनेस से हर महीने 1 लाख रुपए कमा रही हैं

दिल्ली में रहने वाली पूजा कंठ नौकरी छोड़ने के बाद कुछ सालों से घर पर बैठी थीं। मन नहीं लग रहा था, कुछ करना चाहती थीं, लेकिन तय नहीं कर पा रही थीं कि क्या किया जाए। अचानक एक दिन सोशल मीडिया पर उन्हें एक सुंदर सा आर्ट दिखा, जो उन्हें पसंद आया। इंटरनेट के माध्यम से उसके बारे में जानकारी जुटाने लगीं। तब उन्हें पता चला कि यह मैक्रमे आर्ट है। इसमें धागों की मदद से गांठ बनाकर क्रिएटिव चीजें तैयार की जाती हैं। धीरे-धीरे पूजा की दिलचस्पी इसमें बढ़ने लगी और वे खुद भी कलाकारी करने लगीं।

कुछ दिनों बाद पूजा इस आर्ट में माहिर हो गईं, दूसरों को भी ट्रेनिंग देने लगीं। फिर तय किया कि वे अपने इस पैशन को प्रोफेशन बनाएंगी। आज 5 साल बाद पूजा का पैशन और प्रोफेशन चल निकला है। अब वे न सिर्फ इससे खुद लाखों की कमाई कर रही हैं बल्कि दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं की जिंदगी भी संवार रही हैं।

43 साल की पूजा दिल्ली में पली-बढ़ीं। ग्रेजुएशन करने के बाद उनकी नौकरी लग गई। करीब 10 साल तक उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया है। इस दौरान उनकी सैलरी और पोजिशन दोनों अच्छी रही। जबकि उनके पति खुद की ट्रैवल एजेंसी चला रहे थे।

खाली वक्त में कढ़ाई-सिलाई करती थीं

पूजा कहती हैं कि 2012 में बेटे की देखभाल के लिए न चाहते हुए भी मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। कुछ साल बाद जब बेटा बड़ा हो गया तो मैं कुछ काम की तलाश करने लगी। घर पर खाली बैठने का मन नहीं करता था। दूसरी तरफ फिर से मैं कॉर्पोरेट सेक्टर में भी जाना नहीं चाहती थी, क्योंकि जिस वजह से मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी थी, उस स्टेज में वापस नहीं जाना चाहती थी। इसलिए घर पर ही कुछ नया करने की कोशिश करती रहती थी, जब भी खाली समय मिलता सिलाई-कढ़ाई करती रहती थी।

इसी बीच मुझे सोशल मीडिया के जरिए मैक्रमे आर्ट के बारे में जानकारी मिली। मुझे यह आइडिया अच्छा लगा और मैंने इसको लेकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी। मैं रोज यूट्यूब पर इससे रिलेटेड वीडियो देखती और घर पर खुद उस तरह का आर्ट क्रिएट करने की कोशिश करती थी। करीब 2 साल बाद मुझे इस आर्ट के बारे में अच्छी जानकारी हो गई और मैं नई-नई चीजें तैयार करने लगी। रिश्तेदारों की तरफ से इन चीजों के लिए मुझे पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी मिलने लगा।

स्थानीय महिलाओं के साथ की स्टार्टअप की शुरुआत

पूजा कहती हैं कि मैं जहां रहती थी वहां कई ऐसी महिलाएं रहती थीं, जिनके पास कोई काम नहीं था। वे अपने पति पर डिपेंडेंट थीं और उनके पति भी कुछ खास काम नहीं करते थे। यानी एक तरह से उन्हें अपनी आजीविका को लेकर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। मैं चाहती थी कि इन महिलाओं के लिए कुछ किया जाए। मैं अपने पति से भी इसको लेकर चर्चा करती रहती थी। जिसके बाद मेरे पति ने ही मुझे सुझाव दिया कि तुम जो आर्ट तैयार कर रही हो, इसी काम को करो और इन महिलाओं को भी इससे जोड़ो। इससे तुम्हारा भी काम आगे बढ़ेगा और इन महिलाओं को भी मंच मिलेगा।

इसके बाद मैंने आसपास की महिलाओं से बात की। वे काम करने के लिए तो तैयार हो गईं, लेकिन उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। इसके बाद मैंने उन्हें ट्रेनिंग देनी शुरू की। धीरे-धीरे महिलाएं काम करना सीख गईं। हम बाजार से रस्सी और रॉ मटेरियल लाते थे और घर पर ही महिलाओं की मदद से नए-नए होमडेकोर प्रोडक्ट तैयार करते थे। इस तरह कुछ वक्त बाद हमारे पास प्रोडक्ट की अच्छी खासी लिस्ट हो गई। इसके बाद हमने तय किया कि अब इसे हम प्रोफेशनल लेवल पर शुरू करेंगे।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से शुरू की मार्केटिंग

पूजा कहती हैं कि हमने सोशल मीडिया पर पूजा की पोटली नाम से अकाउंट बनाया और उस पर अपने प्रोडक्ट की फोटो अपलोड करने लगे। इसके बाद हमने अमेजन पर खुद का अकाउंट बनाया और उस पर भी अपनी प्रोडक्ट लिस्ट कर दिए। शुरुआत के दो-तीन महीने तक तो कोई ऑर्डर नहीं आया, लेकिन उसके बाद हमें एक के बाद एक ऑर्डर मिलने शुरू हो गए। जैसे-जैसे हमें ऑर्डर मिलते उस हिसाब से प्रोडक्ट बनाकर हम मार्केटिंग करने लगे। कुछ दिनों बाद हमने खुद की वेबसाइट बना ली और कंपनी रजिस्टर करा ली। इसके बाद मार्केटिंग अच्छी होने लगी। देश के अलग-अलग हिस्सों से हमें ऑर्डर आने लगे।

फिलहाल पूजा के पास हर हफ्ते 100 से ज्यादा ऑर्डर आ रहे हैं। कुछ ऑर्डर उन्हें मलेशिया और दूसरे देशों से भी मिले हैं। वे बताती हैं कि जब से हमने Etsy पर अकाउंट बनाया है, तब से हमारे प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ गई है। यहां कस्टमर्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हालांकि कोविड के पहले हमें 200 से ज्यादा हर हफ्ते ऑर्डर मिलते थे। उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद हम उस रफ्तार पर फिर से पहुंचेंगे। अभी हर महीने वे एक लाख रुपए की कमाई कर रही हैं।

क्या है मैक्रमे आर्ट? कैसे तैयार करती हैं प्रोडक्ट?

मैक्रमे आर्ट यानी रस्सियों की गांठ बनाकर उनसे क्राफ्ट तैयार करना। इसमें अलग-अलग तरह की रस्सियों से अलग-अलग आकार की गांठ बनाकर होमडोकोर प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। इसकी शुरुआत 13वीं सदी के आसपास हुई थी। कहां से शुरुआत हुई इसको लेकर कोई पुख्ता दावा नहीं है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि अरब देशों के बुनकरों ने इसकी शुरुआत की थी। वे मोटी-मोटी रस्सियों से गांठ बनाकर अपनी जरूरत की चीजें तैयार करते थे।

कुछ लोग यह भी कहते हैं कि समुद्री नाविक भी खाली समय में इस तरह की चीजें तैयार करते थे। धीरे धीरे उनका काम आर्ट के रूप में तब्दील हो गया, दुनिया भर में फैल गया। बाद में महिलाओं का यह पसंदीदा आर्ट बन गया। वे अपने घरों की सजावट में इस आर्ट का इस्तेमाल करने लगीं।

पूजा अपनी टीम के साथ घर पर ही इस आर्ट को तैयार करती हैं। उनके साथ 25 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, जो इस काम में उनकी मदद करती हैं। वे मार्केट से अलग-अलग तरह की रस्सियां लाती हैं और उससे प्रोडक्ट बनाती हैं। फिलहाल वे वॉल हैंगिंग, कुशन कवर, टेबल रनर, हैंगिंग प्लांटर जैसी चीजें बना रही हैं। इसके साथ ही कई प्रोडक्ट वे लोगों की डिमांड के मुताबिक भी कस्टमाइज्ड रूप में बनाती हैं। अपने प्रोडक्ट की कीमत को लेकर वे बताती हैं कि हमारे पास नॉर्मल रेंज में 100 रुपए से लेकर 5000 हजार रुपए तक के प्रोडक्ट हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Air News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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