डॉक्टरों ने बच्चे को कर दिया था मृत घोषित, मां की पुकार सुनकर ज़िंदा हो गया मां का लाल

डॉक्टरों ने बच्चे को कर दिया था मृत घोषित, मां की पुकार सुनकर ज़िंदा हो गया मां का लाल

इस दुनिया में भगवान पर विश्वास करने वाले लोग बहुत अधिक हैं। ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो भगवान पर विश्वास नहीं करते होंगे। ऐसा बताया जाता है कि भगवान आज भी पृथ्वी पर कोई ना कोई करिश्मा दिखाते रहते हैं, जिसके चलते लोगों का ईश्वर पर विश्वास और अधिक बढ़ जाता है लेकिन आज हम आपको जिस मामले के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं उसको जानने के बाद आप खुद इस बात पर यकीन करने लगेंगे। जी हां, एक 6 साल के बच्चे को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था जिसके बाद मां अपने बच्चे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रो रही थी। बार-बार मां अपने बेटे को यही कह रही थी कि “उठ जा मेरे लाल”, “उठ जा मेरे लाल” और मां की पुकार सुनकर वह बच्चा जिंदा हो गया।

अक्सर आप सभी लोगों ने ज्यादातर फिल्मों में मां की ममता के किस्से सुने होंगे या फिर चमत्कार देखा होगा लेकिन एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला हरियाणा के बहादुरगढ़ से सामने आया है। जहां पर एक मां की पुकार भगवान ने सुन ली। आपको बता दें कि 20 दिन पहले डॉक्टरों ने 6 साल के बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। बच्चे की मृत्यु के बाद परिवार के लोग बेहद ज्यादा दुखी थे। पूरे परिवार में मातम का माहौल छाया हुआ था। दूसरी तरफ मां अपने लाल का माथा चूम-चूमकर रो रही थी। मां के मन में बस यही विश्वास था कि किसी तरह भगवान उसकी पुकार सुन ले और उसका बेटा दोबारा से जीवित हो जाए।

बार-बार मां अपने बेटे को पुकार रही थी। शायद मां को भी अपने इस करुण पुकार की ताकत का अंदाजा नहीं रहा होगा। मां के साथ-साथ वहां पर मौजूद अन्य लोग भी तब आश्चर्यचकित हो गए जब मृत पड़ा हुआ बच्चा पुनः जीवित हो गया। जी हां, बच्चे के शरीर में हरकत होने लगी, जिसके बाद ही तुरंत लोग उस बच्चे को अस्पताल ले गए और उसका दोबारा से इलाज शुरू हो गया। बीते मंगलवार को ही वह बच्चा रोहतक के अस्पताल से हंसता-खेलता अपने घर को वापस आ गया।

खबरों के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि हितेश और उनकी पत्नी जाह्नवी बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं और उनके बेटे को टाइफाइड हो गया था। धीरे-धीरे उनके बच्चे की हालत बिगड़ती गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए दिल्ली लाया गया था। बच्चे को बचाने की हर संभव कोशिश की गई परंतु सारी कोशिशें नाकाम साबित हुई। 26 मई को डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मृत्यु की खबर सुनकर मां का बुरा हाल हो गया। शव को लेकर बहादुरगढ़ वापस आ गए। रात भर के लिए शव को बर्फ पर रखने के लिए परिवार वालों ने तैयारी कर ली और मोहल्ले वालों को सुबह श्मशान घाट पहुंचने के लिए भी कह दिया गया था। घर के मर्द लोग भी काफी दुखी थे लेकिन उन्होंने किसी तरह अपने मन को मजबूत बनाए रखा था और शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे परंतु मां और ताई अन्नू बच्चे के शव के पास बैठी रही और आंखों से आंसू बहते रहे।

बच्चे की मां बार-बार अपने लाल को हिला-हिलाकर देख रही थी और जिंदा होने के लिए बार-बार आवाज लगा रही थी। कुछ देर तक मां अपने बच्चे को पुकारती रही। बाद में शव में हलचल होने लगी, जिसके बाद तुरंत ही पिता हितेश ने बच्चे का चेहरा चादर की पैकिंग से बाहर निकाला और उसे मुंह से सांस देना शुरू कर दिया और एक पड़ोसी ने बच्चे की छाती दबाई, जिसके बाद तुरंत ही परिजन बच्चों को रोहतक के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर पहुंच गए और वहां जाकर यह पता चला कि बच्चे के बचने की उम्मीद महज 15% ही थी लेकिन फिर भी इलाज शुरू कर दिया गया और एक चमत्कार हुआ, मृत घोषित किया गया बच्चा दुबारा से जीवित हो गया और वह बीते मंगलवार तक पूरी तरह से ठीक हो गया और अपने घर को वापस आ गया।

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