22 साल के जितेंद्र फिलहाल ग्रेजुएशन के साथ वर्मी कम्पोस्ट का स्टार्टअप शुरू किया

22 साल के जितेंद्र फिलहाल ग्रेजुएशन के साथ वर्मी कम्पोस्ट का स्टार्टअप शुरू किया

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के रहने वाले जितेंद्र आटोडिया एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से उनका खेती में लगाव रहा। 12वीं के बाद उन्होंने तय किया कि वे खेती में ही करियर बनाएंगे। इसके बाद नाबार्ड (NABARD) से उन्होंने दो महीने की ट्रेनिंग ली और पिछले साल ऑर्गेनिक कम्पोस्ट बनाने का काम शुरू किया। अभी वे मध्यप्रदेश और उसके आसपास के इलाकों में मार्केटिंग करते हैं। कोविड के बाद भी उन्होंने एक साल में 3.5 लाख रुपए की कमाई की है। कई किसानों को उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट बनाने की ट्रेनिंग भी दी है।

22 साल के जितेंद्र फिलहाल ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही अपना कारोबार भी संभाल रहे हैं। पढ़ाई से जो भी वक्त बचता है, उसे वे अपने फार्म हाउस पर वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में उपयोग करते हैं।

जितेंद्र कहते हैं कि खेती से लगाव पहले से रहा। ट्रेनिंग के बाद दिलचस्पी और अधिक बढ़ गई। ट्रेनिंग के दौरान खेती से जुड़े लगभग हर चीज के बारे में जानकारी दी गई। करियर स्कोप के बारे में बताया गया। चूंकि हमारे इलाके में सब्जियों और अनाज की खेती भरपूर होती है। पहले से किसान इस फील्ड में काम कर रहे हैं और कई किसान मॉडर्न तरीके से भी फार्मिंग कर रहे हैं और कमाई भी हासिल कर रहे हैं।

इसलिए मैंने वर्मी कम्पोस्ट पर काम करने का मन बनाया, क्योंकि अभी भी हमारे यहां बहुत कम लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। जो कुछ लोग वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर भी रहे हैं, वे दाम ज्यादा लेते हैं। इसलिए मैंने तय किया कि इसी फील्ड में करियर शुरू करूं और बाजार के मुकाबले कम कीमत पर किसानों को खाद उपलब्ध कराऊं।

बैंक से लोन लेकर शुरू किया खाद बनाना

साल 2019 के अंत में जितेंद्र ने वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए काम करना शुरू किया। करीब 10 लाख रुपए की लागत से उन्होंने अपने खेत में एक फार्म हाउस तैयार करवाया। खाद बनाने के लिए सीमेंट के बेड बनवाए, गोबर की व्यवस्था की और इटालियन प्रजाति के केंचुआ के साथ उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने बैंक से 35% सब्सिडी पर लोन लिया था।

जितेंद्र बताते हैं कि 2020 में मैंने दो किलो केंचुए से खाद बनाना शुरू किया था। एक बेड पर इसका इस्तेमाल किया था। दो महीने बाद जब खाद तैयार हुई तो हमारे पास ढेर सारे केंचुए हो गए। उसके बाद कभी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। धीरे-धीरे हम बेड की संख्या बढ़ाते गए। आज हमारे पास 24 बेड हैं। पिछले साल 500 क्विंटल खाद की सेल हमने की है।

इस साल भी उनका अच्छा बिजनेस चल रहा है। वे मध्यप्रदेश के साथ ही उसके आसपास के इलाकों में भी मार्केटिंग कर रहे हैं। खास बात ये है कि वे मार्केट के मुकाबले सस्ती दर पर किसानों को खाद उपलब्ध करा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने किसानों को महज 6 रुपए किलो की दर से खाद बेची है। फिलहाल वे 8 रुपए किलो की दर से बेच रहे हैं। उन्होंने अपनी कंपनी का नाम आटोडिया वर्मी एग्रीटेक रखा है। तीन लोगों को उन्होंने रोजगार भी दिया है।

प्रोडक्शन के साथ ही किसानों को ट्रेंनिग भी देते हैं

जितेंद्र बताते हैं कि केमिकल फर्टिलाइजर की वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। खेत के साथ ही फसल को भी नुकसान पहुंचता है। ऊपर से हेल्थ को जो नुकसान पहुंचता है वह अलग है। इसलिए मेरी कोशिश है कि दूसरे किसान भी खाद तैयार करें और अपने साथ दूसरों की भी मदद करें।

इसलिए मैं ऐसे किसानों को फ्री ट्रेनिंग देने का भी काम करता हूं। कई लोग हमारे फार्म पर इसकी प्रोसेस को समझने के लिए भी आते हैं। वे बताते हैं कि अभी एक साल ही हुआ है और ऊपर से कोरोना भी आ गया। इसलिए मैं इसे बड़े लेवल पर नहीं ले जा सका। जल्द ही मैं इसका दायरा बढ़ाऊंगा। बेड की संख्या बढ़ाऊंगा।

कैसे तैयार करें वर्मी कम्पोस्ट?

वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के कई तरीके हैं। सबसे आसान तरीका है बेड सिस्टम। इसमें तीन से चार फीट चौड़ा और जरूरत के हिसाब से लंबा बेड बनाया जाता है। इसके लिए जमीन पर प्लास्टिक डाल दी जाती है। फिर उसके चारों तरफ ईंट से बाउंड्री बना दी जाती है। आप चाहें तो सीमेंट का भी बेड बना सकते हैं। बेड बनाने के बाद उसमें गोबर डालकर उसे अच्छी तरह से फैला दिया जाता है। उसके बाद केंचुआ डालकर ऊपर से पुआल या घास-फूस डालकर ढंक दिया जाता है। फिर उस पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है।

बेड की लंबाई कितनी हो, गोबर और केंचुए का अनुपात क्या हो, इसको लेकर वे कहते हैं कि किसान अपनी जरूरत के हिसाब से बेड की लंबाई रख सकता है, लेकिन उसे ध्यान रखना होगा कि उसी अनुपात में उसके पास मटेरियल भी होना चाहिए। अमूमन एक फुट लंबे बेड के लिए 50 किलो गोबर की जरूरत होती है। अगर हम 30 फीट लंबा बेड बना रहे हैं तो हमें 1500 किलो गोबर और 30 किलो केंचुआ चाहिए। केंचुआ कम हो तो भी काम चल जाएगा। बस खाद तैयार होने में वक्त थोड़ा ज्यादा लगेगा, क्योंकि जितना अधिक केंचुआ होगा उतना जल्दी वह खाद तैयार करेगा।

केंचुए की कई प्रजातियां होती हैं। भारत में ज्यादातर लोग इटालियन प्रजाति के केंचुए का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई आइसोनिया फेटिडा भी अच्छी प्रजाति है। यह एक दिन में एक किलो गोबर खाता है और वह डबल भी हो जाता है। यानी जो लोग खाद के साथ केंचुए का बिजनेस करना चाहते हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प है।

कहां ले सकते हैं ट्रेनिंग, लोन की क्या है व्यवस्था?

जितेंद्र खुद भी वर्मी कम्पोस्ट बनाने की ट्रेनिंग मुफ्त में देते हैं। उनकी तरह देश के दूसरे हिस्सों में भी कई किसान इसकी ट्रेनिंग देते हैं। इसके साथ ही नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से भी इसके बारे में जानकारी ली जा सकती है। शुरुआती तौर पर खाद तैयार करने वाले से या कृषि विज्ञान केंद्र से भी बहुत ही कम कीमत पर केंचुए की खरीदी आप कर सकते हैं।

इसके अलावा किसानों के लिए भारत सरकार की एक स्कीम है ACABC यानी एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर। यहां से वर्मी कम्पोस्ट के साथ ही फार्मिंग की दूसरी तकनीकों को लेकर ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके लिए 45 दिन का ऑनलाइन और रेसिडेंशियल कोर्स होता है। जिसकी फीस 500 रुपए होती है। यहां ट्रेनिंग के साथ ही लोन लेने के लिए प्रोसेस और डॉक्युमेंट बनाने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाती है। जनरल कैटेगरी के किसान को 36% और SC,ST, OBC और महिला को 46% सब्सिडी पर 20 लाख रुपए का लोन मिल सकता है। www.agriclinics.net पर विजिट करके आप अधिक जानकारी ले सकते हैं।

कम लागत में कमाएं ज्यादा मुनाफा

वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा लागत की जरूरत नहीं होती। बहुत कम लागत से इसकी शुरुआत की जा सकती है। हमें पहले एक बेड से शुरुआत करनी चाहिए। वह बेड तैयार हो जाए, तो उसी के केंचुए से दूसरी और फिर ऐसा करके तीसरी, चौथी बेड तैयार करनी चाहिए।

वर्मी कम्पोस्ट बनने के बाद ऊपर से खाद निकाल ली जाती है और नीचे जो बचता है, उसमें केंचुए होते हैं। वहां से जरूरत के हिसाब से केंचुए निकालकर दूसरे बेड पर डाले जा सकते हैं। ऐसा करने से हमें बार-बार केंचुआ खरीदने की जरूरत नहीं होगी। खाद की लागत 3 रुपए प्रति किलो आती है। इसे थोक में छह रुपए से लेकर बीस रुपए प्रति किलो तक बेचा जा सकता है।

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