मां की बीमारी ठीक करने के लिए काले गेहूं की खेती की, अब लाखों की कमाई भी हो रही

मां की बीमारी ठीक करने के लिए काले गेहूं की खेती की, अब लाखों की कमाई भी हो रही

मध्यप्रदेश के शुजालपुर के रहने वाले ललित परमार ने मैनेजमेंट की नौकरी छोड़कर कुछ नया करने का निर्णय लिया. उनकी मां डायबिटिक हैं. वह उनके लिए पौष्टिक अनाज की तलाश कर रहे थे. इसी बीच उन्हें काला गेहूं की जानकारी हुई, जिसके बारे में कहा जाता है कि डायबिटिक लोगों को फायदा करता है. यह शुगर फ्री होता है.

ललित पंजाब के रिसर्च सेंटर नेशनल एग्री फूड बायो टेक्नॉलजी मोहाली पहुंचे. वहां उन्होंने काला गेहूं पैदावार करने की खेती का तरीका सीखें. उसकी डिमांड देखते हुए ललित ने 10 एकड़ में काले गेहूं की खेती की.ललित ने भोपाल के कु दोस्तों को भी गेहूं दी. इसके बाद देश भर में मार्केटिंग शुरू कर दी. वे मंडी की जगह सीधे ऑर्डर की सप्लाई करते हैं. अब जिन खेतों से उन्हें मामूली कमाई होती थी, वहां से अच्छी खासी कमाई होने लगी है.

बता दें कि काले गेहूं में एथोसाइनिन की मात्रा सामान्य गेहूं की तुलना में 149 पास प्रति मिलियन अधिक पाई जाती है. एंथ्रोसाइनिन एक नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीबायोटिक है जो कि हार्ट अटैक, कैंसर, शुगर, मानसिक तनाव, घुटनों के दर्द, एनीमिया के लिए फायदेमंद होता है.

 

काला गेहूं, सुगर फ्री के साथ-साथ इसमें स्टार्च की मात्रा भी कम होती है. सााथ ही इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है. इसे पचाना भी आसान होता है और यह पाचन शक्ति को भी मजबूत करती है. फैट की मात्रा कम होने से मोटापा भी नहीं बढ़ता है. इसे बेहद पौष्टिक माना जाता है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Air News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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