ये महिला अपने मुंह से निकालती है लोगों की पथरी, मरीजों की लगी रहती है लोगों की लंबी-लंबी लाइनें

ये महिला अपने मुंह से निकालती है लोगों की पथरी, मरीजों की लगी रहती है लोगों की लंबी-लंबी लाइनें

स्टोन या गुर्दे की पथरी (वृक्कीय कैल्कली,रीनल कॅल्क्युली, नेफरोलिथियासिस) (अंग्रेजी:Kidney stones) गुर्दे एवं मूत्रनलिका की बीमारी है जिसमें, वृक्क (गुर्दे) के अन्दर छोटे-छोटे या बड़े पत्थर का निर्माण होता है।

और यह भीड़ उनसे इलाज करवाने वालों की थी। सीताबाई तल्लीनता से अपने काम में लगी थीं। वे एक व्यक्ति को नीचे लेटातीं। पूछतीं कहाँ दर्द हो रहा है। फिर दर्द वाले स्थान को चूसने लगतीं। कुछ पल बाद ही वे सामने बैठे लड़के को अपने मुँह से पथरी निकालकर दे देतीं।

यह सिलसिला लगातार काफी देर तक चलता रहा। जैसे ही उन्हें कुछ फुरसत मिली, हमने सवालों की झड़ी शुरू कर दी। सीताबाई ने बताया मैं पिछले 18 सालों से पथरी निकालने का काम कर रही हूँ। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वे कहने लगीं मैं हवा हूँ, मेरे 52 स्थान हैं। हर जगह मैं अलग-अलग काम करती हूँ। इलाज का मूलमंत्र माँ पर विश्वास है। यदि विश्वास पक्का हो तो इलाज शर्तिया है, वरना कुछ नहीं हो सकता।यह कहते ही वे वापस अपने मरीजों के इलाज में लग गईं।

एक तरफ सीताबाई तेजी से पथरी निकालने का काम कर रही थीं। वहीं दूसरी तरफ बैठा पंडा पीड़ित लोगों को पालक, टमाटर, बैंगन न खाने की हिदायत दे रहा था। वहीं दवाई के रूप में तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र का चूर्ण दिया जा रहा था, जिसे तीन दिन तक शाम को खाने की सलाह दी जा रही थी। सीताबाई से इलाज कराने के लिए राजस्थान, कानपुर, ग्वालियर आदि अलग-अलग जगह से लोग आए थे।

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