चीन का 21 टन वजनी रॉकेट कंट्रोल से बाहर, पृथ्वी पर मचा सकता है तबाही

चीन का 21 टन वजनी रॉकेट कंट्रोल से बाहर, पृथ्वी पर मचा सकता है तबाही

चीन का एक 21 टन वजनी रॉकेट स्पेस में कंट्रोल से बाहर हो गया तथा तेज गति से पृथ्वी पर गिर रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह भारी भरकम रॉकेट पृथ्वी पर कहां गिरेगा, इसका अभी सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सका है परन्तु यदि यह किसी आबादी वाले क्षेत्र में गिरता है तो वहां पर भारी तबाही मचा सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस रॉकेट का मलबा पेइचिंग, मैड्रिड या न्यूयॉर्क जैसे किसी महानगर में कहीं भी गिर सकता है।

उल्लेखनीय है कि चीन ने हाल ही गुरूवार को अपने Long March 5B रॉकेट को लॉन्च किया था। यह रॉकेट लगभग सौ फुट लंबा और 16 फुट चौड़ा है और नियंत्रण से बाहर होने के बाद 4 मील (लगभग छह किलोमीटर) प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। यह रॉकेट चीन के अंतरिक्ष में बनाए जाने वाले अपने स्पेस स्टेशन का पहला हिस्सा बनाने के लिए भेजा गया था। इस पूरे महत्वाकांक्षी मॉड्यूल को तियान्हे (Tianhe) नाम दिया गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार अभी इस सैटेलाइट का रास्ता चिली, न्यूजीलैंड, न्यूयॉर्क, मैड्रिड, पेइचिंग से होते हुए गुजर रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका मलबा भी इन्हीं में से किसी एक स्थान पर गिर सकता है। हालांकि पृथ्वी तक आते-आते इसका काफी हिस्सा घर्षण से जलने की उम्मीद है फिर भी यदि यह आबादी वाले हिस्से में गिरेगा तो काफी ज्यादा तबाही मचा सकता है। इसके पहले भी मई 2020 में चीनी रॉकेट Long March 5B का मुख्य हिस्सा कंट्रोल से बाहर चला गया था और अमरीका के लॉस एंजेल्स तथा न्यूयॉर्क से होते हुए अटलांटिक महासागर में गिरा था जिसके कारण बड़ी दुर्घटना होने से बच गई थी।

ऐसा होगा चीनी स्पेस स्टेशन
उल्लेखनीय है कि चीन अंतरिक्ष में अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाना चाहता है। वर्तमान में ऐसा जटिल कार्य केवल रूस और अमरीका ही कर पाए हैं। चीन के इस प्रस्तावित स्पेस स्टेशन का नाम तियान्हे (Tianhe) रखा गया है जिसका अर्थ है स्वर्ग का आनंद। इस स्टेशन का आकार अंग्रेजी के T की तरह होगा और इसमें एक बार में 3 स्पेसक्रॉफ्ट पार्क किए जा सकेंगे। इसके बीच में मुख्य मॉड्यूल होगा जबकि दोनों ओर लैब के रूप में प्रयोग किए जाने वाले कैप्सूल होंगे। इसके प्रत्येक मॉड्यूल का वजन लगभग 20 टन होगा। इस स्पेस स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा में 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।

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